एक तिनका धूप के बावजूद
बची है रोशनी की थोड़ी सी उम्मीद
कि बंजर घोषित धरती पर भी
उग आता है कभी कभी
बबूल सा कोई पौधा
और आने जाने वाले पथिकों के लिये
बन जाता है थोड़ी देर सुस्ता लेने का छोटा सा आसरा
Sunday, January 25, 2015
Sunday, August 31, 2014
यादें
न जाने जोड़ना अच्छा है या घटना
यादों में सिर्फ जोड़ा जा सकता है घटाया नहीं
लेकिन यादों का स्वाद क्या बदला जा सकता है ? नहीं न !!!!!!!!!
चाहती हूँ यादों को जोड़ती जाऊँ
कुछ लोरियाँ , मीठी रोटियां , बातों की चाशनी
ऐसे मर्तबानो में भर दूँ की
जब भी खोलूँ एकदम ताजा रहे;
तुम भी दो न मेरे हाँथ में
एक मीठी झप्पी , एक भीना स्पर्श
कुछ ताजे फूल जैसे डेल थे मेरे गले में कभी
आओ न , हमारा साथ एक जिल्द में नत्थी कर दूँ
उस मे कुछ सलमे सितारे सजा दूँ
की जब जब खोले हम साथ साथ मिलें
बरसो बाद , सदियों बाद
तुम्हे पता है ! तुम्हारी चुप्पी का स्वाद कैसा है???
कसैला , कड़वा , अनचाहा
फिर भी , ज्यादा मीठे के साथ थोड़ा कड़वा भाता है
लेकिन ज्यादा ; हजम नहीं होता !!!!!
न जाने जोड़ना अच्छा है या घटना
यादों में सिर्फ जोड़ा जा सकता है घटाया नहीं
लेकिन यादों का स्वाद क्या बदला जा सकता है ? नहीं न !!!!!!!!!
चाहती हूँ यादों को जोड़ती जाऊँ
कुछ लोरियाँ , मीठी रोटियां , बातों की चाशनी
ऐसे मर्तबानो में भर दूँ की
जब भी खोलूँ एकदम ताजा रहे;
तुम भी दो न मेरे हाँथ में
एक मीठी झप्पी , एक भीना स्पर्श
कुछ ताजे फूल जैसे डेल थे मेरे गले में कभी
आओ न , हमारा साथ एक जिल्द में नत्थी कर दूँ
उस मे कुछ सलमे सितारे सजा दूँ
की जब जब खोले हम साथ साथ मिलें
बरसो बाद , सदियों बाद
तुम्हे पता है ! तुम्हारी चुप्पी का स्वाद कैसा है???
कसैला , कड़वा , अनचाहा
फिर भी , ज्यादा मीठे के साथ थोड़ा कड़वा भाता है
लेकिन ज्यादा ; हजम नहीं होता !!!!!
Friday, September 20, 2013
जरुरी है एक राष्ट्र का जिन्दा रहना
रासायनिक विध्वंश के
मुहाने पर खड़ा दमिश्क़
जाने कब महाबली
अमेरिका की गिरफ्त में आ जाये ,
उसकी सारी ताकतें हो
जाएँ नेस्तनाबूत
रोमांटिक कहानियों
का नगर;
लिखने को मजबूर हो
जाये भय , नफरत और जुल्म के अध्याय
सीरिया के गाँवो के
बच्चे
जाने कब हो जाएँ
अनाथ,
उनकी खिलंदड टोलियाँ
;
कब कुचल जाएँ
अमेरिकी सैनिकों के बूटों के नीचे
इस थोड़े से वक्त में;
आओ हम करें कुछ ऐसा
कि रासायनिक हथियार
गाने लगें प्रेम के गीत,
जैसे उन्हें बनाने
वालों के दिलों में भरी थीं रागात्मक भावनाएं,
जैसे ओबामा का दिल
तडपता है अपनी दोनों बेटियों के लिए,
कुछ हो जाये ऐसा की
युद्ध की सारी बातें,
बदल जाएँ नेल्सन
मंडेला के शब्दों में ,
युद्ध के तेवर बदल
जाये गाँधी की अहिंसा धुन में
बच्चे आज़ाद रहें
हमेशा और नापते रहें आकाश परिंदों की तरह;
आओ हम किसी तरह से
बचा लें दमिश्क़ को
और सीरिया अपने
मौलिक रूप में मुस्कुराता रहे
बिना डरे , बिना
झुके अनवरत .
Wednesday, July 24, 2013
Thursday, June 27, 2013
अक्से खुश्बो हूँ बिखरने से न रोके कोई , और बिखर जाऊं तो मुझको न समेटे कोई
यह शायरी है परवीन शाकिर की जो पूरी तरह आजाद रूहों को परिभाषित करती है .
इसी को याद करते हुए कुछ कहने का man कर रहा है
कहते है गुलाम जिस्म में आजाद रूह रहती है तड़पती है
कह दे जिस्मों से आजाद हो जाएँ और रूहों को जिंदगी देदें.
न जहान की चिंता हो हमें, न जान की सोचे कोई
,बस ख़ाब की दुनिया को जमीन पे उतारे कोई
ये आज तमन्ना है की कह दूं हर एक शै से
यह शायरी है परवीन शाकिर की जो पूरी तरह आजाद रूहों को परिभाषित करती है .
इसी को याद करते हुए कुछ कहने का man कर रहा है
कहते है गुलाम जिस्म में आजाद रूह रहती है तड़पती है
कह दे जिस्मों से आजाद हो जाएँ और रूहों को जिंदगी देदें.
न जहान की चिंता हो हमें, न जान की सोचे कोई
,बस ख़ाब की दुनिया को जमीन पे उतारे कोई
ये आज तमन्ना है की कह दूं हर एक शै से
काश
काश मै तुम्हे दे पाती
थोड़ी सी बारिश , थोड़ी सी हवा
एक नदी की रवानी , एक फूल की कहानी
काश सौप पाती तुम्हे
एक पूरा का पूरा मौसम
जो लहलहाता तुम्हारे खेत
काश रख पाती कुछ रोटियां तुम्हारी थाली में
थोड़ा सा नून , थोड़ा सा तेल
बढ़ा पाती तुम्हारी खुराक में
काश कागज के कुछ टुकड़े बन
चुका पाती तुम्हारा कर्ज
दे पाती तुम्हे एक जिंदगी
जैसी तुम चाहते हो
जानती हूँ जिंदगी जरूरत है
और जरूरतें जिंदगी ...........
काश मै तुम्हे दे पाती
थोड़ी सी बारिश , थोड़ी सी हवा
एक नदी की रवानी , एक फूल की कहानी
काश सौप पाती तुम्हे
एक पूरा का पूरा मौसम
जो लहलहाता तुम्हारे खेत
काश रख पाती कुछ रोटियां तुम्हारी थाली में
थोड़ा सा नून , थोड़ा सा तेल
बढ़ा पाती तुम्हारी खुराक में
काश कागज के कुछ टुकड़े बन
चुका पाती तुम्हारा कर्ज
दे पाती तुम्हे एक जिंदगी
जैसी तुम चाहते हो
जानती हूँ जिंदगी जरूरत है
और जरूरतें जिंदगी ...........
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