Aparna_kutubnagar
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मेरा परिचय
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Sunday, August 31, 2014
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यादें न जाने जोड़ना अच्छा है या घटना यादों में सिर्फ जोड़ा जा सकता है घटाया नहीं लेकिन यादों का स्वाद क्या बदला जा सकता है ? नहीं न !!!!...
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Friday, September 20, 2013
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जरुरी है एक राष्ट्र का जिन्दा रहना रासायनिक विध्वंश के मुहाने पर खड़ा दमिश्क़ जाने कब महाबली अमेरिका की गिरफ्त में आ जाये , उसकी सार...
Wednesday, July 24, 2013
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Thursday, June 27, 2013
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अक्से खुश्बो हूँ बिखरने से न रोके कोई , और बिखर जाऊं तो मुझको न समेटे कोई यह शायरी है परवीन शाकिर की जो पूरी तरह आजाद रूहों को परिभाषित ...
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कहानी काश कहानी इतनी छोटी होती की उसे समेट सकती एक जिंदगी में , एक ज़िंदगी जो मुस्कान सी अनोखी किलकारी सी मासूम और बच्...
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काश काश मै तुम्हे दे पाती थोड़ी सी बारिश , थोड़ी सी हवा एक नदी की रवानी , एक फूल की कहानी काश सौप पाती तुम्हे एक पूरा का पूरा मौसम...
Saturday, June 15, 2013
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अपनी आखों में टिके आसमान से पूछें आज उसे घर नहीं जाना? उसकी माँ राह देखती होगी दरवाजे पर आस लगाये हर आने जाने वाले से पूछा...
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