Wednesday, October 28, 2009

परदेश

लक्खू की माँ कहती है , बेटा परदेश मत जा
तेरे पैदा होने के पहले गए थे तेरे बापू
आज तक नही लौटे ,
मगरे की बहन गई थी ब्याह कर शहर
कहते है बैठा दिया उसके पति ने उसको कोठे पर
मन्नू का भाई गया था एक बार
लौटा लेकिन वैसा नही जैसा गया था
शरीर , मन , आत्मा सब कुछ बेच आया
और ले आया ऐसा रोग जिसका कोई इलाज नही ,
बेटा ! यर शहर छीन लेते है हमसे हमारी पहचान
हमारी आवाज , हमारी इज्जत , हमारा विश्वास
और बदले में देते है हमें भूख की मज़बूरी में
हमारी आधे से भी कम कीमत ,
खुला आसमान , बूटो की मार , झोली भर भर गालियाँ और .....................
वह सब कुछ जो हम किसी को देने की कल्पना भी नही कर सकते...

Thursday, October 15, 2009

Aparna_kutubnagar

Aparna_kutubnagar

छोटा सा अनुरोध

जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना
अँधेरा धरा पर कंही रह न जाए ......................
इस दीप पर्व पर आप सब से अनुरोध है कि घर में उजाला करने के साथ साथ अपने दिलों को भी रोशन करें और आने आस पास बिखरे दुखों को मुस्कानों में बदलने कि कोशिश जरूर करे ।
जब अपने ही दूर हो जायें तो क्या होली क्या दिवाली
याद उन्हें भी आयी मेरी , मेरी भी आँखे भर आयी ,
याद आ रही है वो जगमग दीपो भरी रंगोली मेरी
बच्चो के संग खेलखेल में घर चौबारे खूब सजाये
दादा के संग हर चौखट पर दिए रखाए
अब भी आती है दिवाली
लेकिन नही खुशी है वैसी
सब कुछ करती हू वैसा ही
फिर भी नही खुशी होती है
हर पग पर यादों की टोली
अपनों की बाते ले आए
आब त्योहारों के रंग फीके है
ये क्या हुआ समय ने हम से
क्यो अपनों को दूर किया है
काश समय ही फिर कुछ करके
अपनों से हमको मिलवाए
और त्योहारों को ले आरे
फिर हर दिन होली , रात दिवाली
खुशियाँ होंगी रंग रंगीली
यही है आशा , यही उम्मीद
समय एक बार फिर आएगा
हमें हमारे दिन lautayega .

Monday, September 21, 2009

देश का हाल

एक दिन एक गाँव में एक आदमी ने अपने परिचय में कहा " मै इस गाँव का मालिक ......... पंचायत सेवक हू। वैसे यंहा का सारा कुछ मै ही देखता हुगाँव कस लोगों को कुछ नही मालूम होता है। ये तो गरीबी रेखा में नाम होते हुए भी इंदिरा आवास लेने नही आते। ये क्या जाने सरकार के काम। इसीलिए तो हमारे देश का यह हाल है। "

दोस्तों

देश का यह हाल सरकारी लोगों के इस नजरिये के कारन है या गाँव के गरीब लोगों के कारन। आप के सुझाव आमंत्रित है.

Tuesday, September 1, 2009

दोस्त और दुश्मन

दोस्त और दुश्मन में अन्तर मत कर
क्या पता आज का दोस्त कल दुश्मन बन जाय
और दुश्मन दोस्ती का हाथ बढाये
बस तैयार रहो आज और कल से निपटने का
क्योंकि यह सब समय का खेळ है
और हम समय के हाथ की kathputaliyan

Gulab

1
प्रिय क्या तुम भेज सकते हो एक गुलाब
और वादा कर सकते हो मुझसे
इसके कभी भी न मुरझाने का
२
तुमने कुछ लाल गुलाब भेजे थे
मेरी किताबो में अभी भी जिन्दा है उनकी पंखुडियां
और हाँ........... उनकी खुशबू bhi
पर तुम्हारे संदेश kyon मुरझा गए

३
कागज की कश्तियों से समंदर पर नही किया जाता
झूठे ख्वाबों से गुलशन आबाद नही किया जाता
प्यार तो एक धर्म है , पूजा है , विश्वास है
सिर्फ गुलाबों से इस पर एतबार नही किया जाता