Friday, June 14, 2013

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Wednesday, March 6, 2013

keemat

कितने कितने अक्षर लिखकर कितने कितने शब्द बनाये
ख्वाबों की दुनिया में जाकर  कितने सारे  ख्वाब सजाये
एक अकेला ख्वाब था ऐसा जिसने कीमत बहुत लगाई
इस कीमत के मोल भाव ने दुनिया मुझको खूब दिखाई
आज अकेला ख्वाब है अपना , बाकि सब कुछ हुआ पराया
लेकिन कोई ग़म न मुझको ....
एक ख्वाब है एक ही जीवन
एक ज़मी पर बना बसेरा
एक आसमा , एक आत्मा
फिर क्या चिंता  

Tuesday, December 4, 2012

kitni  khubsurat thi wo baat jab tumhari muskano ne bikhere the phool ;
 kaliyon ne hami bhari thi kal phir se khilne ki
 koi baat thi jo prakrati ne khole the apne raj
aur najaro ko di thi aajadi janva hone ki .


Sunday, March 13, 2011

होली में न आने का न्योता

आना नहीं आना नहीं आना नहीं भाई
मजबूरी है पसरी घर में आना नहीं भाई
थाली में अब खाना नहीं है आना नहीं भाई
पीने को अब पानी नहीं है घर न आना  भाई
जेब  हमारी रुखी सूखी हाथ नहीं है धेली
मंहगाई  की आफत आई कैसे मनाएं होली
सुख के रंग हो गए फीके, दुख के रंग चपल हैं
ख़ुशी भरी आँखों में भाई, दुख के अश्रु भरे है.
गुझिया में अब खोया नहीं, होगी केवल हवा
चीनी की है किल्लत घर में, नहीं बनेगा हलवा.
चाय बन रही काली काली, दूध  हो गया मंहगा  
बासी कपड़ों से कम चलाओ नया न मागो लंहगा
रंग लगाने की बारी में टीका सिर्फ लगाओ
सिर्फ गले मिलकर ही भैया , होली में कम चलाओ.




Monday, March 7, 2011

आज के दिन की असीम शुभकामनायें

आज  का दिन मस्ती और धमाल का दिन है . क्या कहते हो दोस्तों ! आज का दिन अपना दिन है और अपने अपनों का दिन है. अंतर्राष्ट्रीय  महिला दिवस . महिलाओं के वजूद और उनकी अहमियत की मान्यता का दिन . महिलाओं के कर्तव्यों के साथ उनके अधिकारों का दिन. जी हाँ ! आज का दिन मतलब  उल्लास का दिन.
हजार जख्म सहकर मुस्कुराने का दिन नहीं , मुक्ति के सपने को यथार्थ में बदलने का दिन !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
लेकिन सिर्फ आज का दिन ही क्यों??????????????
क्या हर  दिन आज के दिन जैसा नहीं हो सकता ?????????
हो सकता है ......... और हम इसे कर के दिखायेंगे.
यही  है आज के दिन का संकल्प .
इस संकल्प में हमारे साथी हमारे साथ होंगे............ इसी विश्वास के साथ आज के दिन की असीम शुभकामनायें.

Wednesday, February 2, 2011

कल हो न हो .........................

कल हो न हो .........................
ख्वाहिशे इतनी की चाँद को कर लूँ अपनी मुट्ठी  में
सितारों की चादर तान लूँ अपने आसपास
तजुर्बा है की ख्वाहिशों के पर निकलने से कितने ही असमान छोटे पड़ जाते हैं
जानती हूँ " कल किसने देखा "
आज ही दामन को फैलाये बैठी हूँ
जैसे ही कोई कली खिले , एक भी किरण मुस्कुराये
तो हमारी झोली में ही आये .

Tuesday, February 1, 2011

एक दोस्त के लिए

एक दोस्त के लिए
आज तुम्हारी बहुत याद आई
संवाद का टूटना उतना बुरा नहीं होता
वास्तव में कुछ बुरा है तो है रिश्तों का विखंडन
अकेलापन न तो तुम्हारे पास है न मेरे पास
क्या कहीं  ऐसा नहीं लगता की
कुछ कोहरा सा छk गया है हमारे आस पास
जो हमारी आँखों को कर रहा है अँधा
क्या हम अपने अपने सन्नाटे में डूब नहीं गए
मै मानती हूं  जिंदगी किसी एक के पीछे ख़त्म नहीं होती
पर क्या एक एक के ख़त्म होने से जिंदगी सूनी नहीं हो जाती  
मानती हूं  लोगों की कमी नहीं है तुम्हारे और हमारे पास
पर क्या टटोला है कभी ,
उनमे से कितने है तुम्हारे अपने
आस पास बिखरी खिलखिलाहटों में ,
कितनी  खुशी तुम्हारे हिस्से की है 
सुनना भले ही मत किसी की
लेकिन एक बार सच्चे मन से अपने भीतर जरूर झांकना
क्या कोई कोना ख़ाली नहीं लग रहा  !.........................