Wednesday, July 19, 2017

तसल्ली


गिरना


Tuesday, July 11, 2017

एहसास

उदास रात के पैरों में तेरी रुनझुन थी,
अक्स उभरा कि सीपियों ने उबासी ली .
हांथ रखा तु छू गये रिश्ते ऐसे ,
नदी जैसे सदियों से इक समन्दर थी.

मै बेचारी


एकांत


 ओस का कम्बल कितना घना  था
 वो गुलाबी  रात  की बातें 

Sunday, January 25, 2015

Aparna_kutubnagar

एक तिनका धूप के बावजूद

बची है रोशनी की थोड़ी सी उम्मीद

कि बंजर घोषित धरती पर भी

उग आता है कभी कभी

बबूल सा कोई पौधा

और आने जाने वाले पथिकों के लिये

बन जाता है थोड़ी देर सुस्ता लेने का छोटा सा आसरा

Sunday, August 31, 2014

यादें 

न जाने जोड़ना अच्छा है या घटना
यादों में सिर्फ जोड़ा जा सकता है घटाया नहीं
लेकिन यादों का स्वाद क्या बदला जा सकता है ? नहीं न !!!!!!!!!
चाहती हूँ यादों  को जोड़ती जाऊँ
कुछ लोरियाँ , मीठी रोटियां , बातों की चाशनी
ऐसे मर्तबानो में भर दूँ की
जब भी खोलूँ  एकदम ताजा रहे;
तुम भी दो न मेरे हाँथ में
एक मीठी झप्पी ,  एक भीना स्पर्श
कुछ ताजे फूल जैसे डेल थे मेरे गले में कभी 
आओ न ,  हमारा साथ एक जिल्द में नत्थी कर दूँ
उस  मे कुछ सलमे सितारे सजा दूँ
की जब जब खोले हम साथ साथ मिलें
बरसो बाद , सदियों बाद
तुम्हे पता है ! तुम्हारी चुप्पी का स्वाद कैसा है???
कसैला , कड़वा , अनचाहा
फिर भी , ज्यादा  मीठे के साथ थोड़ा कड़वा भाता है
लेकिन ज्यादा ; हजम नहीं होता !!!!!


Friday, September 20, 2013

जरुरी है एक राष्ट्र का जिन्दा रहना

रासायनिक विध्वंश के मुहाने पर खड़ा दमिश्क़
जाने कब महाबली अमेरिका की गिरफ्त में आ जाये ,
उसकी सारी ताकतें हो जाएँ नेस्तनाबूत
रोमांटिक कहानियों का नगर;
लिखने को मजबूर हो जाये भय , नफरत और जुल्म के अध्याय
सीरिया के गाँवो के बच्चे
जाने कब हो जाएँ अनाथ,
उनकी खिलंदड टोलियाँ ;
कब कुचल जाएँ अमेरिकी सैनिकों के बूटों के नीचे
इस थोड़े से वक्त में;
आओ हम करें कुछ ऐसा
कि रासायनिक हथियार गाने लगें प्रेम के गीत,
जैसे उन्हें बनाने वालों के दिलों में भरी थीं रागात्मक भावनाएं,
जैसे ओबामा का दिल तडपता है अपनी दोनों बेटियों के लिए,
कुछ हो जाये ऐसा की युद्ध की सारी बातें,
बदल जाएँ नेल्सन मंडेला के शब्दों में ,
युद्ध के तेवर बदल जाये गाँधी की अहिंसा धुन में
बच्चे आज़ाद रहें हमेशा और नापते रहें आकाश परिंदों की तरह;
आओ हम किसी तरह से बचा लें दमिश्क़ को
और सीरिया अपने मौलिक रूप में मुस्कुराता रहे
बिना डरे , बिना झुके अनवरत .


Wednesday, July 24, 2013

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Thursday, June 27, 2013

अक्से खुश्बो हूँ बिखरने  से न रोके कोई , और बिखर जाऊं  तो मुझको न समेटे कोई
यह शायरी है परवीन शाकिर की जो पूरी तरह आजाद रूहों को परिभाषित करती है .
इसी को याद करते हुए कुछ कहने का man कर रहा है
कहते है गुलाम जिस्म में आजाद रूह रहती है तड़पती है
कह दे जिस्मों से आजाद हो जाएँ और रूहों को जिंदगी देदें.
न जहान की चिंता हो हमें, न जान की सोचे कोई
,बस ख़ाब की दुनिया को  जमीन पे उतारे कोई
ये आज तमन्ना है की कह दूं हर एक शै से

 कहानी 

काश 
कहानी इतनी  छोटी होती 
की उसे समेट  सकती एक जिंदगी   में ,
एक ज़िंदगी जो मुस्कान सी अनोखी 
किलकारी सी मासूम और बच्चे सी नाजुक है 

काश
 कहानी इतनी लम्बी होती 
की रख पाती उसे पास 
जिससे नाप सकती पूरी धरती 
पर कहानी तो कहानी है 
जो जरुरत पड़ने पर चुक जाती है 
और जरुरत न होने पर ख़त्म ही नहीं होती .
काश
काश मै तुम्हे दे  पाती
थोड़ी सी बारिश , थोड़ी सी हवा
एक नदी की रवानी , एक फूल की कहानी
काश सौप पाती  तुम्हे
एक पूरा का पूरा मौसम
जो लहलहाता तुम्हारे खेत
काश रख पाती कुछ रोटियां तुम्हारी  थाली में
थोड़ा सा नून , थोड़ा सा तेल
बढ़ा पाती  तुम्हारी खुराक में
काश कागज के कुछ टुकड़े बन
चुका  पाती  तुम्हारा कर्ज  
दे पाती  तुम्हे एक जिंदगी
जैसी तुम चाहते हो
जानती हूँ जिंदगी जरूरत है
और जरूरतें जिंदगी ...........  


Saturday, June 15, 2013


अपनी   आखों में टिके आसमान से पूछें 
आज उसे घर नहीं जाना? 
उसकी माँ  राह देखती होगी
दरवाजे पर आस लगाये 
हर आने जाने वाले से 
पूछा होगा :
मेरा बेटा , आज लौटने का वादा करके 
रात गया था एक समंदर लाने घर को 
न जाने क्यों न   आया  अब तक 
क्या कोई ले आएगा उसको पास मेरे ...................






Friday, June 14, 2013

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Wednesday, March 6, 2013

keemat

कितने कितने अक्षर लिखकर कितने कितने शब्द बनाये
ख्वाबों की दुनिया में जाकर  कितने सारे  ख्वाब सजाये
एक अकेला ख्वाब था ऐसा जिसने कीमत बहुत लगाई
इस कीमत के मोल भाव ने दुनिया मुझको खूब दिखाई
आज अकेला ख्वाब है अपना , बाकि सब कुछ हुआ पराया
लेकिन कोई ग़म न मुझको ....
एक ख्वाब है एक ही जीवन
एक ज़मी पर बना बसेरा
एक आसमा , एक आत्मा
फिर क्या चिंता  

Tuesday, December 4, 2012

kitni  khubsurat thi wo baat jab tumhari muskano ne bikhere the phool ;
 kaliyon ne hami bhari thi kal phir se khilne ki
 koi baat thi jo prakrati ne khole the apne raj
aur najaro ko di thi aajadi janva hone ki .


Sunday, March 13, 2011

होली में न आने का न्योता

आना नहीं आना नहीं आना नहीं भाई
मजबूरी है पसरी घर में आना नहीं भाई
थाली में अब खाना नहीं है आना नहीं भाई
पीने को अब पानी नहीं है घर न आना  भाई
जेब  हमारी रुखी सूखी हाथ नहीं है धेली
मंहगाई  की आफत आई कैसे मनाएं होली
सुख के रंग हो गए फीके, दुख के रंग चपल हैं
ख़ुशी भरी आँखों में भाई, दुख के अश्रु भरे है.
गुझिया में अब खोया नहीं, होगी केवल हवा
चीनी की है किल्लत घर में, नहीं बनेगा हलवा.
चाय बन रही काली काली, दूध  हो गया मंहगा  
बासी कपड़ों से कम चलाओ नया न मागो लंहगा
रंग लगाने की बारी में टीका सिर्फ लगाओ
सिर्फ गले मिलकर ही भैया , होली में कम चलाओ.




Monday, March 7, 2011

आज के दिन की असीम शुभकामनायें

आज  का दिन मस्ती और धमाल का दिन है . क्या कहते हो दोस्तों ! आज का दिन अपना दिन है और अपने अपनों का दिन है. अंतर्राष्ट्रीय  महिला दिवस . महिलाओं के वजूद और उनकी अहमियत की मान्यता का दिन . महिलाओं के कर्तव्यों के साथ उनके अधिकारों का दिन. जी हाँ ! आज का दिन मतलब  उल्लास का दिन.
हजार जख्म सहकर मुस्कुराने का दिन नहीं , मुक्ति के सपने को यथार्थ में बदलने का दिन !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
लेकिन सिर्फ आज का दिन ही क्यों??????????????
क्या हर  दिन आज के दिन जैसा नहीं हो सकता ?????????
हो सकता है ......... और हम इसे कर के दिखायेंगे.
यही  है आज के दिन का संकल्प .
इस संकल्प में हमारे साथी हमारे साथ होंगे............ इसी विश्वास के साथ आज के दिन की असीम शुभकामनायें.